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Rang-birange phoolon ka ek guldasta

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जख्म दिल के

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    जहर से कुछ भरे भी होते हैं‚

    लोग थोड़े बुरे भी होते हैं।

    वक्त पर सब खड़े नहीं होते‚

    दोस्त कुछ तो खरे भी होते हैं।

    जो हैं कहते के हम नहीं डरते‚

    वह यकीनन डरे भी होते हैं।

    गुफ्तगू हो तो जिंदा मत समझो‚

    उनमें कुछ तो मरे भी होते हैं।

    दोस्त सबको समझना ठीक नहीं‚

    भेस दुश्मन धरे भी होते हैं।

    वक्त के साथ सब नहीं भरते,

    जख्म दिल के हरे भी होते हैं।

    ‘राज’ करते हैं जो बड़ी बातें‚

    लोग ऐसे गिरे भी होते हैं।



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Nirmala Singh Gaur के द्वारा
June 20, 2014

दोस्त सबको समझना ठीक नहीं‚ भेस दुश्मन धरे भी होते हैं। वक्त के साथ सब नहीं भरते, जख्म दिल के हरे भी होते हैं। बहुत बड़ा सच बहुत सुंदर शब्दों में पेश किया है ,अच्छी रचना के लिए बधाई .


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