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Rang-birange phoolon ka ek guldasta

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मुझे ख़्याल रहा.

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बिछड़ के तुमसे,
हमारा अजीब हाल रहा,
तुम्हारे बाद भी जिंदा हैं,
ये कमाल रहा.

सज़ा कुबूल है लेकिन,
खता हुई क्या है ?
हमारे लब पे हमेशा,
ही ये सवाल रहा.

ये ज़िन्दगी का सफ़र,
यूँ तो चल रहा है मगर,
तुम्हारा साथ नहीं है,
यही मलाल रहा.

फ़साना मैंने मोहब्बत का,
है लिखा लेकिन,
तुम्हारा नाम न आये,
मुझे ख़्याल रहा.

मिले थे जब मुझे ,
और जब जुदा तुम हुए,
वो लम्हा याद मुझे,
“राज”सालों – साल रहा.



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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
August 20, 2013

बहुत खूब / बहुत खूब /

yogi sarswat के द्वारा
August 19, 2013

ज़िन्दगी का सफ़र, यूँ तो चल रहा है मगर, तुम्हारा साथ नहीं है, यही मलाल रहा. फ़साना मैंने मोहब्बत का, है लिखा लेकिन, तुम्हारा नाम न आये, मुझे ख़्याल रहा. बहुत खूब

August 16, 2013

मिले थे जब मुझे , और जब जुदा तुम हुए, वो लम्हा याद मुझे, “राज”सालों – साल रहा. bahut sundar .


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