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Rang-birange phoolon ka ek guldasta

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ईद है

Posted On: 8 Aug, 2013 Others,कविता में

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eid
साथ हों अपने तो समझो ईद है,

सच हों गर सपने तो समझो ईद है।

जुस्तजू में चांद के गर आसमां को,

सब लगें तकने तो समझो ईद है।

चल के दुकानों से सिंवई दोस्तों,
लग गई पकने तो समझो ईद है।

कोई छोटा हो या फिर कोई बड़ा,

सब लगें सजने तो समझो ईद है।

चेहरा मुरझाया सा रोजेदार का,

जब लगे खिलने तो समझो ईद है।

हो मुबारक ईद ,मुबारक ईद हो,

सब लगें कहने तो समझो ईद है।



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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jaishree Verma के द्वारा
August 12, 2013

ईद मुबारक भाईजान ! सुन्दर रचना ! बधाई !

seemakanwal के द्वारा
August 8, 2013

बहुत खूब .बधाई

August 8, 2013

sundar bhavnatmak .eid mubarak .


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