mera desh

Rang-birange phoolon ka ek guldasta

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Posted On 7 Jun, 2012 Others में

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कोई वादा न वफ़ा है तुमसे,
जाने क्यों दिल ये लगा है तुमसे.
हमने देखा जो नहीं था अबतक,
ख्वाब आँखों में सजा है तुमसे.
कैसे इंकार मैं कर दूँ यारा,
दिल के धड़कन की सदा है तुमसे.
तुम नहीं थे तो मैं ढूँढ रहा था तुमको,
आज अपना भी पता है तुमसे.
एक मुद्दत से खिज़ा का था बसेरा हर सू,
फूल गुलशन में खिला है तुमसे.
लाख समझाया, न समझे अब तो ,
दिल ये दीवाना लगा है तुमसे.
तुम नहीं साथ, तसल्ली है मगर,
नाम मेरा तो जुड़ा है तुमसे.
तुम मिले तो कोई ख्वाहिश न रही,
कोई क्या जाने क्या मिला है तुमसे.

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

pritish1 के द्वारा
July 21, 2012

मैंने सोचा नहीं था आप दिल पर भी लिखते हैं……. बहुत अच्छा लगा आपका अपना प्रीतीश

मनु (tosi) के द्वारा
June 10, 2012

आदरणीय खान साहब जी , सादर ! आपकी गजल वाकई दिल को छु गई … संतुलित और बढ़िया पंक्तियाँ !! बधाई !!

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
June 7, 2012

आदरणीय खान साहब , सादर दिल की गहराई की chaahat ऐसी ही होती है शायद. बधाई.

vikramjitsingh के द्वारा
June 7, 2012

आदरणीय जलालुदीन खान साहब….सलाम… दो शब्द आपकी इस सुन्दर ग़ज़ल पर अर्ज़ करते हैं…. ”नसीम-ऐ-सुबह गुलशन में गुलों से खेलती होगी….. किसी की आखिरी हिचकी…किसी की दिल्लगी होगी.”

चन्दन राय के द्वारा
June 7, 2012

जलालुद्दीन खान मित्रवर , कोई वादा न वफ़ा है तुमसे, जाने क्यों दिल ये लगा है तुमसे. हमने देखा जो नहीं था अबतक, ख्वाब आँखों में सजा है तुमसे. बहुत सुन्दर गजल , जिस भी मोहतरमा को आपकी इस गजल की इनायत होगी , कैसे वो आपके बिना रहेगी

dineshaastik के द्वारा
June 7, 2012

तुम नहीं थे तो मैं ढूँढ रहा था तुमको, आज अपना भी पता है तुमसे. तुम मिले तो कोई ख्वाहिश न रही, कोई क्या जाने क्या मिला है तुमसे. आदरणीय खान साहब, बहुत ही खूबसूरत  गजल। उपरोक्त  पंक्तियाँ तो बहुत  ही लाजवाब…बधाई http://dineshaastik.jagranjunction.com/ मृत्यु के पूर्व  और मृ्त्यु के बाद


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